मदुरै के इस आदमी ने खोजा है प्लास्टिक से रोड बनाने का तरीका, अब होगा पर्यावरण शुध्द

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नमस्कार दोस्तो, आज के समय में अगर पर्यावरण को शुध्द करना है तो प्लास्टिक के उपयोग को पुरी तरह से बंद करना होगा। प्लास्टिक कि चीज़ खतरनाक है। चाहे पन्नी हो या बोतल सभी प्लास्टिक के आ रहें हैं।

  road made by plastic. now will be purified environment

क्या प्लास्टिक हमारी निर्भरता है ?

चाहे हम जितना भी कोशिश कर लें लेकिन प्लास्टिक पर हमारी निर्भरता खत्म नहीं हो सकती है। प्लास्टिक का डिस्पोजल ही प्लास्टिक के कुप्रभाव का समाधान है। लेकिन अभी तक कोई ऐसी तकनीक नहीं आयी जिससे प्लास्टिक का डिस्पोजल किया जा सके।

प्लास्टिक से होने वाले नुक्सान से हम सभी परिचित हैं। हमारे प्लास्टिक प्रयोग करने से अन्य जानवरों को इससे दिक्कत हो रही है। चाहे वह समुद्री जीव हो या जमीनी, हर जगह जीव इससे प्रभावित हो रहें हैं। मानव इस समस्या का अगर उत्पादक है तो वही इसका विनाशक भी होना चाहिए। नहीं तो आने वाले समय में आगे की पीढ़ियों के लिए हम बहुत बड़ी समस्या छोड़ जाएंगे। जिसका भुगतान मनुष्य के साथ साथ बेज़ुबा जानवर भी भुगतेंगे।

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अगर प्लास्टिक के लाखों बैग कचरा बनने के बजाये सड़क बनाने में काम आये तो यह हुआ ना एक तीर से दो शिकार ? पर्यावरण बचाने का ऐसा उपाय सिर्फ एक भारतीय ही खोज सकता है।

आइये जानते हैं कोन है मदुरै

तमिलनाडु के मदुरै में रहने वाले राजगोपालन वासुदेवन ने बेकार प्लास्टिक से सड़के बनाने का आईडिया खोज लिया है। इन्होने 2001 में त्यागराजन यूनिवर्सिटी में रसायन विज्ञान के डीन वासुदेवन ने अपनी लैब में प्रयोग किया। इस प्रयोग में उन्होंने पाया कि डाम्बर और प्लास्टिक का मिश्रण रोड को मजबूत बनाता है।

कैसे करे इसका उपयोग

इस प्रयोग में उन्होंने पाया कि डाम्बर और प्लास्टिक का मिश्रण रोड को मजबूत बनाता है।जहाँ 1 किलोमीटर सिंगल लेन की रोड बनाने के लिए 10 टन डाम्बर का उपयोग होता है वहीं प्लास्टिक मिलाने से 9 टन डाम्बर का प्रयोग होता है। इसमें एक 1 टन प्लास्टिक होता है।

डाम्बर में प्लास्टिक मिलाने से सड़को में पानी का रिसाव नहीं होगा। इससे बना रोड ज्यादा भार के वाहनों को झेल सकता है। प्लास्टिक को सड़क में बनाने से पहले गिट्टी को 100 डिग्री सेल्सियस पर गर्म करते हैं उसमे फिर प्लास्टिक छोटे- छोटे करके डाल देते हैं फिर डाम्बर को मिला करके इसे एक मिश्रण बना लिया जाता है।

वासुदेवन ने अपने इस प्रयोग को पेटेंट कराया है। उन्होंने इसे भारत सरकार को फ्री में दे दिया है। आज भारत के 11 राज्यों में 1 लाख किलोमीटर से ज्यादा की रोड बन चुकी है।

यह बात सच है कि अगर प्लास्टिक का डिस्पोजल नहीं किया जा सकता है तो उसे प्रयोग में लाया जा सकता है जिससे पर्यावरण प्रदुषण भी न हो।

आइये कदम बढाये स्वच्छता की ओर !

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