प्राकृतिक सौंदर्य: एशिया का सबसे सुंदर गावं, जहाँ लगती है एंट्री फिस ओर बेटी होती है उत्तराधिकार !

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Natural Beauty: The most beautiful village in Asia

नमस्कार दोस्तो, प्राकृतिक सौंदर्य प्राकृति कि अमुल्य धरोहर है। जिसे संजोये रखना मानव का धर्म ओर कर्तव्य होता है। तो चलिये आपको ले चलते है ऐसे गांव मे जहाँ  के बारे मे न तो सुना ओर न हि ऐसा गांव देखा होगा। बतादे कि एशिया का सबसे सुन्दर गांव जहाँ आपको एंट्री फिस देना होता है।

The most beautiful villages of AsiaThe most beautiful villages of Asia

यकीन नही हो रहा होगा क्या है इस गांव कि सुंदरता का राज तो चलिये बतादे कि मेघालय का मौलिनोंग एशिया का सबसे सुन्दर गांव है।  मौलिनोंग एशिया का सबसे सुन्दर गांव है जिसकी पहचान विश्वभर मे प्रसिद्ध है|

बेटी होती है उत्तराधिकार ! 

आपने अभी तक यह देखा है कि बेटा ही पिता के बाद उत्तराधिकारी होता है लेकिन आज आपको एक नयी बात बताने जा रहे है कि, इस गांव की आबादी खासी समुदाय से हे।

इस समुदाय मे शादी के बाद लड्के को लड्की के घर जाना पडता हे,सबसे छोटी बेटी माता‌‌‌-पिता की उत्तराधिकार होती हे। बच्चो को माता का उपनाम मिलता हे।

100 साल पुराना र्चच, नदी पर रबर का पुल

The most beautiful villages of AsiaThe most beautiful villages of Asia

गांव मे एक बास से 85 फुट लम्बा आकाशीय स्तभ बनाया गया हे, जिससे प्राक्र्ति को निहारा जा सकता हे। गाव के बीच मे ब्रिटिश शेली मे बना एक 100 साल पुराना एपिफेनी र्चच हे।

मौलिनोंग गांव के पडोसी गांव रिवाय मे नदी पर, रबर के पेडो की जडो से गुथे हुए जाल से बना एक पुल भी है। गांव मे बडी चट्टान छोटे पत्थर पर टिकी हे। यह प्रकृति मे भौतिक सन्तुलन का अदभुत नमूना है।

हर शनिवार को करते हे साप्ताहिक सफाई

The most beautiful villages of Asia

शनिवार को साप्ताहिक सफाई की परम्परा है। पर्यटको को गांव वाले अपने घरो मे ठहराते है। क्योकि यहाँ कोई होटल या अतिथिग्रह नही हे। खाने मे जेविक सब्जिया, देशी मुर्गा, पोधो से बनी चटनी ओर उबला हुआ सलाद परोसा जाता हे। गांव मे महिलाओ की सख्या पुरुषो के मुकाबले जादा हे। समाज मे महिलाओ का स्तर उच्चतम हे।

न पालिथीन का इस्तेमाल,न ही धुम्र्पान, घरो मे जेविक शोचालय

मौलिनोंग जेसा हे उसे सरकार ने नही बल्कि गांव वालो ने खुद ने बनाया है। हालाकि सरकार ने गांव तक अच्छी सड्क ओर बिजली जरुर उपल्ब्ध कराई हे। गांव क्रषि प्रदान, लेकिन सिर्फ जैविक खेती होती है।

महिलाएं गांव मे आए पर्यटको को ओर मेहमानो की मेजबानी करती हे,जबकी पुरुष  वाहन चलाने के साथ-साथ खेती करते हे। गांव मे ज्यादातर चीजे बास से ही बनी हे। गाव मे कोई पारिवारिक या सामाजिक विवाद नही हे। विवाद होने पर उसे बुर्जुगो की समिति हल कर देती हे।

पहुँच मार्ग

मेघालय के पुर्वी पहाडियो पर बसा मोलिनोंग न सिर्फ़ भारत का बल्कि ऐशिया का भी सबसे स्वच्छ ओर सुन्दर गांव हैं। राजधानी शिलोंग से 78 किलोमीटर दूर भारत-बांग्लादेश की सीमा के नजदीक बसा मोलिनोंग प्राकृतिक सुंदरता के लिए विख्यात है।

मोलिनोंग नंदी की वजह से गावं का नाम मोलिनोंग पडा है। खुबसूरति को मोली कहते हैं और नदि को नोंग यानी जीतनी खुबसुर यह नदि है उतना ही खुबसुरत है मोलिनोग गावं। जंगल मे बसें इस छोटे से गावं में महज़ 35 घर है और घरो में रहते है मात्र 113 बाशिदें । 2003 में ‘डिस्कवरी इंडिया’ ने इसे एशिया का सबसे स्वच्छ गांव घोषित किया था।मोलिनोग को देखने पर लगता है मानो प्रकृति का बगीचा हों। गांव में प्रवेश के लिए 10 रुपये प्रति व्यक्ति शुल्क निर्धारित है।

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