नेत्रहीन मां को तीर्थ कराने के लियें 36000 किलोमीटर पैदल चल चूका है ये कलयुग का श्रवण कुमार, देखियें

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नमस्कार दोस्तों,आपने सतयुग के श्रवण कुमार की कहानी तो जरुर सूनी होगी जिन्हें आज भी माता-पिता की सेवा के लिए जाना जाता है! बतादे श्रवण कुमार के माता-पिता नेत्रहीन थे! लेकिन श्रवण कुमार ने कभी भी उन्हें नेत्रहीन होने का अहसास नहीं होने दिया! लेकिन आपको बतादे की कलयुग में भी एक ऐसा श्रवण कुमार है जो अपनी नेत्रहीन मां की सेवा में लगा हुआ है! बतादे हम यहाँ बात कर रहे है मध्यप्रदेश जबलपुर के रहने वाले कैलाश गिरी ब्रह्मचारी की जिन्हें कलयुग का श्रवण कुमार कहाँ जाता हैं!

आज से करीब 25 साल पहले कैलाश गिरी की नेत्रहीन मां ने अपने बेटे से ‘चारधाम यात्रा’ की इच्छा ज़ाहिर की थी! फिर क्या था मां की इस इच्छा को पूरा करने के लिए कैलाश करीब 25 साल पहले अपनी नेत्रहीन वृद्ध मां को कंधों पर डोली के सहारे चारधाम यात्रा के साथ कई तीर्थों का भ्रमण कराने निकल पड़े. और आज भी ये सिलसिला जारी है! आपको जानकर हैरानी होगी कि कैलाश गिरी अपनी मां को डोली के सहारे कंधों पर बैठाकर अब तक 36000 किलोंमीटर पैदल चल चुके हैं! चौंकाने वाली बात है कि कैलाश ने जिस वक़्त ये यात्रा शुरू की थी उस वक़्त इनकी उम्र 25 साल थी और आज कैलाश लगभग 50 साल के हो चुकें हैं!

बतादे अपनी यात्रा के दौरान कैलाश गिरी लोगों द्वारा दिए गए सामान से ही अपनी मां के लिए ख़ुद खाना बनाते है और अपने हाथों से उन्हें खिलाते है! अब तक कैलाश अपनी मां को बद्रीनाथ, द्वारिका, जगन्नाथपुरी, रामेश्वरम और इसके साथ ही गंगासागर, तिरुपति बालाजी, ऋषिकेश, हरिद्वार, केदारनाथ, अयोध्या, चित्रकूट, पुष्कर और इलाहाबाद जैसे पवित्र तीर्थों स्थानों की यात्रा करा चुके हैं!

तो दोस्तों कलयुग के इस श्रवण कुमार के लियें एक लाईक तो बनता है!

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