OMG पहली बार समुद्र में 11 किमी अंदर पहुंचा इंसान, लेकिन वहां का नजारा देखकर उड़ गए सबके होश

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नमस्कार दोस्तों,अमेरिकी समुद्री खोजकर्ता ‘विक्टर वेस्कोवो’ पहली बार समुद्र में 11 किलोमीटर की गहराई में पहुंचे,तो उन्हें वहां भी बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का कचरा मिला। बतादे वह प्रशांत महासागर के “मारियाना ट्रेंच” में करीब चार घंटे तक रहे। जानकारी देदें की यह दुनिया का सबसे गहरा स्थान है। विक्टर को यहां समुद्री जीवों के अलावा प्लास्टिक के बैग और मिठाई के खाली डब्बे मिले।बतादे विक्टर की टीम पनडुब्बी और मोटर शिप के जरिए मारियाना ट्रेंच की निचली सतह पर पांच बार उतरी। टीम ने दूरदराज के इलाकों का पता लगाने के लिए ‘रोबोटिक लैंडर्स’ तैनात किए थे। विक्टर ने कहा कि अभियान के दौरान हमारी पूरी टीम बहूत उत्साहित थी। हमने तेज लहरों के बीच गहरे और कठोर समुद्र में उतरने मे सफलता हासिल की है। यह उच्च समुद्री तकनीक के इस्तेमाल का एक अच्छा उदाहरण है।
पहली बार 1960 में अमेरिकी नौसेना के लेफ्टिनेंट डॉन वॉल्श और स्विटजरलैंड के इंजीनियर जैक्स पिककार्ड मारियाना ट्रेंच में करीब 10 किमी तक ही पहुंच सके थे। वही सालभर पहले चीन की पनडुब्बी भी पहली बार समुद्र के अंदर 4027 मीटर गहराई तक पहुंची थी।

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बतादे अमेरिका कई दशकों तक चीन को प्लास्टिक कचरा सस्ते दामों पर निर्यात करता रहा। उधर कनाडा भी अपना कचरा फिलीपींस के मनीला बंदरगाह पर डंप करता है। ये अमीर देश बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा उत्पन्न करते हैं, लेकिन उसकी रिसाइकिलिंग नहीं कर पाते,और फिर सस्ते दामों पर अपना कचरा दुसरे देशों को बेच देते है!आपको जानकर हैरानी होगी की दुनिया में सालाना 30 करोड़ टन प्लास्टिक कचरे का उत्पादन होता है। रिसर्च के मुताबिक, दुनियाभर के महासागरों में लगभग 10 करोड़ टन प्लास्टिक कचरा मौजूद है। इसमें से 90 प्रतिशत कचरा सिर्फ दस नदियों के जरिए समुद्र में पहुंचता है। इसमें एशिया की नदियों की संख्या सबसे ज्यादा हैं। वही भारत से निकलने वाली गंगा और सिंधु नदी भी इसमें शामिल है।

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