इस गुफा में आज भी मौजूद है भगवान गणेश जी का कटा हुआ सिर, खुद उनके पिता शिव करते हैं इसकी रक्षा

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नमस्कार, हिन्दू धर्म के अनुसार जब भी कोई मांगलिक कार्य किया जाता है तो सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है! हम सभी जानते है की भगवान गणेश को गजानन के नाम से भी जाना जाता है,और ऐसा इसलिए क्योंकि उनका सिर हाथी का है और शरीर एक इंसान की तरह! आपको बता दें की भगवान शिव ने गुस्से में गणेश जी का सिर काटने के बाद उन्हें हाथी का मस्तक लगाया गया था, लेकिन शायद आप यह नहीं जानते होंगे कि गणेश जी का असली मस्तक कहां है? तो चलियें आज हम आपको आज बताते हैं! आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भगवान गणेश का असली सिर आज भी एक गुफा में मौजूद है! दरअसल भगवान गणेश के पिता भगवान शिव जी ने गुस्से में आकर उनका सर काट कर शरीर से अलग कर दिया था, लेकिन हाथी का सिर लगाने के बाद शिव जी ने गणेश जी के असली सिर को एक गुफा में रख दिया था, और उस गुफा का नाम था पाताल भुवनेश्वर!सूत्रों की माने तो ये गुफा उत्तराखंड के पिथौड़ागढ़ के गंगोलीहाट से 14 किलोमीटर दूर स्थित है! कहा तो ये भी जाता है कि गणेश जी के इस कटे हुए सिर की रक्षा खुद उनके पिता भगवान शिव करते हैं! बतादे इस गुफा में भगवान गणेश के कटे सिर शिलारूपी मूर्ति के ऊपर 108 पंखुड़ियों वाला “शवाष्टक दल ब्रह्म कमल” के रूप की एक चट्टान है,और इस ब्रह्मकमल से हमेशा भगवान गणेश के शिलारूपी मस्तक पर पानी की दिव्य बूंद टपकती रहती है! साथ ही मुख्य बूंद आदि गणेश के मुख में भी गिरती हुई नजर आती है!

ऐसी मान्यता है कि यह ब्रह्मकमल भगवान शिव ने ही यहाँ पर स्थापित किया था! जानकारी के मुताबिक पाताल भुवनेश्वर में मौजूद गणेश जी की इस मूर्ति को आदि गणेश भी कहा जाता है! ऐसा बताया जाता है की कलयुग में इस गुफा की खोज आदिशंकराचार्य ने की थी!

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